भाजपा जिलाध्यक्ष की मनमानी से,पार्टी में गुटबाजी चरम पर,वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की अनदेखी से पार्टी को हो सकता है बड़ा नुकसान

मुंगेली।
कड़ाके की ठंड के बीच मुंगेली की सियासत इस वक्त खासा गर्म है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर गलियों तक राजनीतिक चर्चाएं जोरों पर हैं। खास तौर पर भाजपा संगठन के भीतर मची उठापटक ने माहौल को और अधिक सियासी बना दिया है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुंगेली जिले में भाजपा के तीन प्रमुख चेहरे हैं — केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक पुन्नूलाल मोहले। तीनों ही नेता अपने-अपने स्तर पर प्रभावशाली माने जाते हैं, ऐसे में संगठन के भीतर प्रतिस्पर्धा और अपना वर्चस्व दिखाने की कोशिशें लगातार जारी रहती हैं।स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुंगेली विधानसभा और शहरी क्षेत्र में विधायक पुन्नूलाल मोहले की पकड़ सबसे मजबूत है। पार्टी और प्रशासनिक स्तर पर उनकी सिफारिशों को नज़रअंदाज़ करना संगठन के लिए आसान नहीं होता।
कार्यकर्ताओं में नाराजगी, बैठकों से दूरी
समर्थकों का कहना है कि हाल के दिनों में पार्टी की कई बैठकों में वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ता शामिल नहीं हुए, जिसका कारण संगठन के भीतर बढ़ती उपेक्षा और अपमान की भावना है। कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्षों की निष्ठा और मेहनत के बावजूद उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही, जिससे उनका मनोबल टूट रहा है।
संगठन पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस असंतोष को नहीं संभाला गया, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों और संगठन की मजबूती पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं की अनदेखी पार्टी को भीतर से कमजोर कर सकती है।
जिलाध्यक्ष की प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी इस विषय पर खुलकर कुछ कहने से परहेज किया है।
अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और संगठन में बढ़ते असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





