मुंगेली: स्वर्ण जयंती स्तंभ के पास ‘अवैध’ निर्माण पर गरमाया माहौल, नगर पालिका ने थमाया नोटिस

मुख्य चौक पर शासकीय भूमि दबाने का आरोप; जनदर्शन में शिकायत के बाद प्रशासन सख्त, 48 घंटे में मांगा जवाब
मुंगेली। शहर के सबसे व्यस्त और व्यावसायिक केंद्र ‘पुराना बस स्टैंड’ (मेन चौक) पर एक विवादित निर्माण ने नगर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। स्वर्ण जयंती स्तंभ जैसी ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की लोकेशन से सटे एक भू-खंड पर हुए कथित अवैध निर्माण के खिलाफ अब स्थानीय स्तर पर मोर्चा खुल गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर से लिखित शिकायत की गई है, जिसके बाद नगर पालिका ने संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सरदार पटेल वार्ड निवासी किशोर बैरागी ने जनदर्शन में साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, सीट नंबर 38/सी, भू-खण्ड क्रमांक 45/1 की लगभग 2000 वर्गफुट भूमि पर दुकान और मकान का भव्य निर्माण किया गया है। यह भूमि रुचि जैन (पति गौतम चंद जैन) के नाम पर दर्ज बताई जा रही है। आरोप है कि यह निर्माण न केवल नगर पालिका द्वारा स्वीकृत नक्शे के विपरीत है, बल्कि इसमें नजूल और शासकीय भूमि पर भी अतिक्रमण किया गया है।

नगर पालिका का कड़ा रुख: 2 दिन की मोहलत
शिकायत मिलते ही नगर पालिका परिषद मुंगेली एक्शन मोड में आ गई है। विभाग द्वारा जारी नोटिस (क्रमांक: 34/4/न.पा./भ.नि.शा./2025-26) में स्पष्ट कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य ‘भवन अनुज्ञा’ (Building Permission) की सीमाओं का उल्लंघन करता पाया गया है।
चेतावनी: भवन स्वामी को दस्तावेज पेश करने के लिए मात्र 02 दिन का समय दिया गया है। यदि समय सीमा के भीतर वैध दस्तावेज या अनुमति नहीं दिखाई गई, तो नगर पालिका अवैध हिस्से को ढहाने (Dismantle) की कार्रवाई करेगी।
शिकायतकर्ता की 3 प्रमुख मांगें:
- तकनीकी जांच: स्वीकृत नक्शे और मौके पर वास्तव में हुए निर्माण का भौतिक मिलान किया जाए।
- भूमि की पैमाइश: राजस्व विभाग के माध्यम से शासकीय और नजूल भूमि पर हुए बेजा कब्जे की शिनाख्त हो।
- कठोर कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाए।
राजनीतिक दबाव की चर्चाएं तेज
शहर के मुख्य चौक पर हुए इस निर्माण को लेकर स्थानीय गलियारों में राजनीतिक रसूख और दबाव की चर्चाएं भी आम हैं। चर्चा है कि रसूखदारों के संरक्षण के कारण अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन जनदर्शन में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन बैकफुट पर नहीं दिखना चाहता। अब देखना यह होगा कि 48 घंटे की समय सीमा समाप्त होने के बाद नगर पालिका वास्तव में बुलडोजर चलाती है या यह मामला कागजों तक ही सीमित रह जाता है।





