मुंगेली: रामचरित मानस सम्मेलन का भव्य आगाज, सीता चरित्र के वर्णन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

मर्यादा और धैर्य की प्रतिमूर्ति हैं माता सीता, सत्संग ही देता है जीवन को सही दिशा: सुश्री किशोरी सहचरी
मुंगेली। नगर के प्रतिष्ठित रामायण चौक स्थित शंकर मंदिर (खरीपारा) में 37वें श्रीरामचरित मानस विराट सम्मेलन का रविवार, 4 जनवरी को अत्यंत श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में भव्य शुभारंभ हुआ। 12 जनवरी तक चलने वाले इस नौ दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन के पहले ही दिन बड़ी संख्या में मानस प्रेमी और श्रद्धालु उमड़े।
माता सीता के आदर्शों का वर्णन
सम्मेलन के प्रथम दिवस अवध धाम से पधारीं प्रखर वक्ता सुश्री किशोरी सहचरी ने जगत जननी माता सीता के पावन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने सीता जी के त्याग, मर्यादा, सहनशीलता और नारी गरिमा का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि उनका जीवन हर युग के लिए आदर्श है। उनके प्रेरक प्रसंगों को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रोता भावविभोर हो गए।
सत्संग की महिमा पर व्याख्यान
तत्पश्चात, पंडित रामभद्र मिश्र एवं सुश्री किशोरी सहचरी (मानस मयूर, अवध धाम) ने संयुक्त रूप से सत्संग की महत्ता समझाई। ‘बिनु सत्संग विवेक न होई’ की व्याख्या करते हुए विद्वानों ने कहा कि बिना सत्संग के मनुष्य में सही-गलत का निर्णय लेने वाले विवेक का उदय नहीं होता। भगवान की कथा और रामचरित मानस का श्रवण ही वह मार्ग है, जो मानव जीवन को सार्थकता और सफलता प्रदान करता है।
12 जनवरी तक बहेगी ज्ञान की गंगा
समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह सम्मेलन आगामी 12 जनवरी तक निरंतर चलेगा। प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक मानस के विभिन्न प्रसंगों पर विद्वानों द्वारा प्रवचन दिए जाएंगे।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर पंडित अयोध्या प्रसाद तिवारी, संजय तिवारी, मोहन उपाध्याय, रमेश देवांगन सहित श्रीरामचरित मानस सम्मेलन समिति के समस्त पदाधिकारी, सदस्यगण एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।




