2026 का बजट निराशाजनक, किसान और गांव सरकार की प्राथमिकता से बाहर: संजय यादव

बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं पर चली कैंची, महंगाई-बेरोजगारी पर सरकार मौन
मुंगेली ✍️जिला महामंत्री संजय यादव ने वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आम जनता और किसानों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट स्पष्ट संदेश देता है कि अब सरकार की प्राथमिकताओं में गांव, गरीब और किसान शामिल नहीं हैं।
किसान और कृषि क्षेत्र की अनदेखी
संजय यादव ने आरोप लगाया कि इतिहास में पहली बार ऐसा बजट पेश किया गया है जिसमें किसान का नाम तक नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, “बजट में न सिंचाई के लिए कोई ठोस योजना है, न खाद की उपलब्धता पर बात की गई है और न ही खेतिहर मजदूरों के लिए किसी वित्तीय प्रावधान का जिक्र है।” ### कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती
जिला महामंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में हुई कटौती पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार ने विकास के दावों के विपरीत हर महत्वपूर्ण क्षेत्र के बजट को घटा दिया है। उनके अनुसार:
- सब्सिडी पर प्रहार: फसल बीमा, यूरिया सब्सिडी और उज्ज्वला गैस योजना के बजट में भारी कटौती की गई है।
- सामाजिक असुरक्षा: गरीब कल्याण अन्न योजना समेत सामाजिक विकास और ग्रामीण विकास के फंड को कम कर दिया गया है।
- शिक्षा और छात्रवृत्ति: बच्चों की छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की राशि में कटौती करना शिक्षा के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
- वर्गों की उपेक्षा: ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण हेतु आवंटित क्षेत्रों में भी कटौती देखी गई है।
महंगाई और बेरोजगारी का हल नहीं
संजय यादव ने कहा कि देश आज बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन्हें रोकने का कोई संकल्प दिखाई नहीं देता। उन्होंने वैश्विक बाजार की हलचल से भारतीय बाजार को सुरक्षित रखने के उपायों के अभाव पर भी सवाल उठाए।




