मुंगेली नगर पालिका की निविदा पर मचा घमासान: बनी हुई सड़क के लिए टेंडर जारी करने का आरोप, वार्ड नंबर में भी गड़बड़ी

मुंगेली। नगर पालिका परिषद मुंगेली द्वारा वार्ड क्रमांक 8 (झूलेलाल मंदिर के पास) में सीसी सड़क निर्माण के लिए जारी की गई एक निविदा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए नगर पालिका उपाध्यक्ष जय प्रकाश मिश्रा और पार्षद मोहन मल्लाह ने मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों का दावा है कि जिस स्थान के लिए लाखों का टेंडर निकाला गया है, वहां सड़क पहले से ही मौजूद है।

क्या है पूरा मामला?
नगर पालिका प्रशासन ने 29 जनवरी 2026 को एक मैनुअल निविदा सूचना जारी की थी। इसके तहत झूलेलाल मंदिर के पास सीसी सड़क निर्माण के लिए 7.78 लाख रुपये की अनुमानित लागत तय की गई थी। निविदा की शर्तों के अनुसार, आवेदन की अंतिम तिथि 6 फरवरी और जमा करने की तिथि 20 फरवरी 2026 निर्धारित थी।
उपाध्यक्ष ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
नगर पालिका उपाध्यक्ष जय प्रकाश मिश्रा ने इस प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनता के पैसों की बर्बादी करार दिया है। उन्होंने कहा, “जिस स्थान का उल्लेख निविदा में है, वहां सड़क पहले से बनी हुई है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर नई सड़क कहाँ बनाई जा रही है? बिना आवश्यकता के दोबारा निविदा निकालना समझ से परे है।”
वार्ड नंबर को लेकर भी बढ़ा विवाद
मामले में नया मोड़ तब आया जब वार्ड क्रमांक 5 (शंकर वार्ड) के वरिष्ठ पार्षद मोहन मल्लाह ने निविदा में तकनीकी खामियों और स्थान के गलत चयन की बात कही। उन्होंने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि:
- गलत वार्ड का उल्लेख: निविदा में कार्य स्थल वार्ड क्रमांक 8 बताया गया है, जबकि झूलेलाल मंदिर का क्षेत्र वास्तव में वार्ड क्रमांक 5 (शंकर वार्ड) में आता है।
- निरस्तीकरण की मांग: पार्षद मल्लाह के अनुसार, वार्ड नंबर की गलती और पहले से बनी सड़क के कारण यह निविदा संदेह के घेरे में है, जिसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
जनता में असंतोष, प्रशासन की चुप्पी
इस विवाद के बाद स्थानीय नागरिकों में भी भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जा रही है। वार्ड की भौगोलिक स्थिति और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर निविदा जारी करना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, इस पूरे विवाद पर नगर पालिका परिषद मुंगेली के प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस निविदा को संशोधित करता है, निरस्त करता है या फिर अपनी सफाई में कोई नया तर्क पेश करता है।





