अपोलो फार्मेसी का ‘हौसला’ बुलंद: 2 महीने पहले चला था बुलडोजर, अब फिर से निर्माण तेज

मुंगेली। जिला प्रशासन की नाक के नीचे भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी बानगी मुंगेली शहर के पुराने बस स्टैंड स्थित अपोलो फार्मेसी परिसर में देखने को मिल रही है। महज दो महीने पहले जिस अवैध निर्माण को प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ ढहाया था, वहां अब फिर से ईंट-पत्थर जुड़ने लगे हैं। प्रशासन की कार्रवाई को ठेंगा दिखाते हुए किया जा रहा यह पुनर्निर्माण अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञात हो कि लगभग दो माह पूर्व जिला प्रशासन, नगर पालिका और नजूल विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। नगर के किशोर बैरागी की शिकायत पर कलेक्टर जनदर्शन में मिले निर्देशों के बाद जांच की गई थी। जांच में पाया गया था कि दुकान स्वामिनी श्रीमती रुचि जैन (पति गौतम जैन) द्वारा स्वीकृत भूमि से कहीं अधिक क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर बिल्डिंग तानी गई थी।
मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था, लेकिन वहां भी दुकान मालिक का पक्ष टिक नहीं पाया। वैध दस्तावेज पेश न कर पाने और अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अवैध हिस्से को जमींदोज कर दिया था।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद फिर वही हिमाकत
हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर कानूनी डंडा चला था, वहां फिर से निर्माण कार्य शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह सीधे तौर पर जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली को चुनौती देने जैसा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिल्डिंग मालिक को किसका संरक्षण प्राप्त है?
- क्या इस अवैध निर्माण को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है?
- क्या विभाग की कार्रवाई महज दिखावा थी, जिसके बाद पर्दे के पीछे ‘सेटिंग’ हो गई?
- इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी मालिक में दोबारा अतिक्रमण करने की जुर्रत कहां से आई?
अधिकारियों का पक्ष
इस संबंध में जब संबंधित विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दोबारा अवैध निर्माण किया जा रहा है, तो यह पूरी तरह गैर-कानूनी है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की तत्काल जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर पुनः कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका की साख पर सवाल
शहर के मुख्य मार्ग और पुराने बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाके में दोबारा अतिक्रमण होना नगर पालिका और नजूल विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते इस निर्माण को नहीं रोका गया, तो यह संदेश जाएगा कि मुंगेली में रसूखदार लोग कानून और प्रशासन से ऊपर हैं।





