मुंगेली: दवाइयों की दुकान में बरसता है ‘गौ-प्रेम’, नाम पुकारते ही चली आती है ‘राधा’

मुंगेली। ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए मुंगेली का एक प्रतिष्ठित परिवार सेवा की नई इबारत लिख रहा है। नगर का कोठारी परिवार अपने मेडिकल स्टोर के माध्यम से न केवल मरीजों को जीवनदायिनी दवाएं उपलब्ध करा रहा है, बल्कि बेजुबान पशुओं के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का केंद्र भी बन गया है।

न बंधन, न रस्सी: बस आत्मीयता का नाता
नगर के इस मेडिकल स्टोर में दृश्य आम दुकानों से बिल्कुल अलग होता है। यहाँ दवाइयों की अलमारियों के बीच ‘राधा’ नाम की गाय और उसके बछड़े ‘वृंदा’ व ‘किशोरी’ बेखौफ घूमते नजर आते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि ये गौ-वंश किसी खूंटे या रस्सी से बंधे नहीं हैं। ये पूरी तरह स्वतंत्र और घुमंतू हैं, लेकिन कोठारी परिवार के साथ इनका रिश्ता इतना गहरा है कि प्रतिदिन सुबह दुकान का शटर खुलते ही राधा अपने बछड़ों के साथ खुद-ब-खुद दहलीज पर पहुँच जाती है।
दुआओं और प्रेम का केंद्र
दुकान संचालक के मुताबिक, यह महज भोजन का आकर्षण नहीं बल्कि वर्षों का आत्मीय लगाव है। परिवार ने इन बेजुबानों को अपने सदस्यों की तरह ही नाम दिया है। जब इन्हें पुकारा जाता है, तो ये किसी पालतू सदस्य की तरह ही प्रतिक्रिया देते हैं। दुकान पर आने वाले ग्राहक भी इस अद्भुत तालमेल को देखकर चकित रह जाते हैं।
चुपचाप सेवा का संकल्प
बिना किसी शोर-शराबे या दिखावे के, कोठारी परिवार ‘गौ-सेवा’ के अपने संकल्प को धरातल पर उतार रहा है। जहाँ आज के दौर में लोग पशुओं से दूरी बना रहे हैं, वहीं इस परिवार ने साबित कर दिया है कि यदि प्रेम निस्वार्थ हो, तो बेजुबान भी उसे बखूबी समझते हैं। यह पहल मुंगेली नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है और जीव-दया का संदेश प्रसारित कर रही है।





