ब्रेल लिपि और सांकेतिक भाषा से खुलेगा दिव्यांग बच्चों के लिए ज्ञान का द्वार: बीआरसी मुंगेली में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न


मुंगेली। राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर के निर्देशानुसार, जिला शिक्षा अधिकारी श्री एल.पी. डाहिरे एवं जिला मिशन समन्वयक श्री अशोक कश्यप के मार्गदर्शन में बीआरसी भवन मुंगेली में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। 21 और 22 जनवरी को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।
समावेशी शिक्षा पर जोर:

कार्यक्रम में जिला परियोजना कार्यालय से एपीसी (IED) श्री लेखराम साहू, एपीसी (पेडागोजी) श्री प्रदीप उपाध्याय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री जितेंद्र बावरे एवं बीआरसी श्री सूर्यकांत उपाध्याय ने शिरकत की। अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों के अधिगम (सीखने) में आने वाले अंतराल (गैप) को कम करना और उन्हें समान अवसर प्रदान करना विभाग की प्राथमिकता है।
21 प्रकार की दिव्यांगताओं पर चर्चा:
बीआरपी श्री संजीव सक्सेना एवं स्पेशल एजुकेटर श्री कौशल पात्रे ने समावेशी शिक्षा के अंतर्गत आने वाली 21 प्रकार की दिव्यांगताओं और ‘बाधा मुक्त वातावरण’ की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में बच्चों को सांकेतिक भाषा और ब्रेल लिपि की बुनियादी जानकारी भी दी गई।
गतिविधि आधारित अधिगम:
इस कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें दिव्यांग और सामान्य बच्चों ने ‘पियर्स ग्रुप’ (सहपाठी समूह) बनाकर विभिन्न प्रोजेक्ट्स तैयार किए और उनका प्रेजेंटेशन दिया। मास्टर ट्रेनर्स बृजेश्वर मिश्रा, दुर्गेश देवांगन, चंद्रशेखर उपाध्याय और राजेश गबेल ने बच्चों को स्कूल में बाधा रहित वातावरण बनाने हेतु परामर्श दिया। वहीं वीर सिंह सिकंदर, डॉ. रूही फातिमा एवं डिंडोरे मैडम ने बच्चों को फंक्शनल एक्टिविटी कराकर उनका उत्साहवर्धन किया।
इनका रहा विशेष योगदान:
प्रशिक्षण को सफल बनाने में लेखपाल संतोष नामदेव, डाटा एंट्री ऑपरेटर अमित दुबे, खगेश कनौजिया, राजेश साहू और अभिषेक बंजारे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन और आभार प्रदर्शन मास्टर ट्रेनर दुर्गेश देवांगन द्वारा किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक और अभिभावक उपस्थित थे, जिन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इस पहल की सराहना की।





