महिला जागृति मंडल का वनांचल में सेवा भाव, वनवासी पाठशाला के बच्चों को स्वेटर–कंबल व वस्त्र वितरण

मुंगेली। अचानकमार अभ्यारण्य के सुदूर वनग्राम बिसौनी स्थित प्रयास वनवासी पाठशाला में महिला जागृति मंडल मुंगेली की ओर से स्वेटर और कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।�� महिला जागृति मंडल की सदस्यों ने वनवासी पाठशाला के नन्हें बच्चों को स्वेटर भेंट किए, वहीं उनके माता–पिता को साड़ी, कंबल, बंगाली, पेंट–शर्ट आदि देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन महिला जागृति मंडल की सदस्य लक्ष्मी सोनी ने किया। उन्होंने कहा कि इतने दूरस्थ क्षेत्र में, जहां शिक्षा और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, वहाँ प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन द्वारा वनवासी पाठशाला का संचालन करना उनकी संवेदनशीलता और शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।�� विशिष्ट वक्ता श्रीमती प्रमिला चौरसिया ने कहा कि घने जंगलों के बीच इतनी सुव्यवस्थित पाठशाला का संचालन अपने–आप में अद्भुत और प्रेरणादायक है।इस अवसर पर श्रीमती सोनी ने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित किया और स्वच्छता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। महिला जागृति मंडल द्वारा प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन को वनवासी शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। पाठशाला के शिक्षक–शिक्षिकाओं को भी बंगाली, पायजामा और साड़ी देकर सम्मानित किया गया।��पाठशाला परिसर में जागृति मंडल की सभी सदस्यों ने आम का पौधा रोपित किया और वनवासी परिवारों से अपने–अपने घर के आंगन में कम से कम एक फलदार पौधा अवश्य लगाने का आग्रह किया।�� कार्यक्रम के अंत में प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन की ओर से महिला जागृति मंडल की टीम को वनवासी पाठशाला पहुंचकर बच्चों एवं पालकों को उपहार प्रदान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।कार्यक्रम पश्चात सभी ग्रामीणों को मिठाई तथा बच्चों को चॉकलेट का वितरण महिला जागृति मंडल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महिला जागृति मंडल की प्रमुख सदस्य श्रीमती सरिता बाजपेयी, श्रीमती प्रमिला चौरसिया, श्रीमती सावित्री सोनी, श्रीमती मंजू सोलंकी, श्रीमती शीला जायसवाल, श्रीमती मेघा मिश्रा, कमल श्रीवास्तव, श्रीमती अर्चना सोनी, श्रीमती मधु उप्पल, श्रीमती सुधा राजपूत, रिंकी बनर्जी, शशि सोनी, श्रीमती संगीता छतरी, वंदना गुलहरे, श्रीमती शकुंतला राजपूत सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहीं।






