दशरथ जी ने राम प्रेम में जीवन और मरण दोनों को किया सार्थक: पं. आनंद उपाध्याय

झलियापुर (कुंडा)। समीपस्थ ग्राम झलियापुर में श्री संतोष ठाकुर एवं परिवार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय मानस प्रवचन के प्रथम दिन श्रोता भक्ति रस में सराबोर हो गए। ग्रामाचार्य पंडित मनहरण शर्मा के मार्गदर्शन एवं श्री ओमप्रकाश के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्वान वक्ताओं ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आदर्शों और राजा दशरथ के अनन्य प्रेम पर प्रकाश डाला।
राजा दशरथ का प्रेम सत्य और अगाध: पं. आनंद उपाध्याय
परम पूज्य शंकराचार्य जी के शिष्य पंडित आनंद उपाध्याय (कवर्धा) ने प्रवचन के दौरान कहा कि राजा दशरथ वेदमूर्ति स्वरूप हैं और उनकी तीनों रानियां— कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा— क्रमशः ज्ञानकांड, कर्मकांड और उपासनाकांड का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने दशरथ जी को ‘बड़भागी’ कहा है क्योंकि उन्होंने जीवन में प्रभु की बाल लीलाओं का आनंद लिया और मृत्यु के समय राम नाम जपते हुए प्राण त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया।
पं. उपाध्याय ने ‘नित्य दान’ की महिमा बताते हुए कहा कि शास्त्रों और शिव महापुराण में इसका विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि सामान्य दान की तुलना में पर्वों और विशेष तिथियों पर दान का फल कई गुना बढ़ जाता है, किंतु नित्य दान करने से सभी तिथियों का पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से शंकराचार्य आश्रम के पावन प्रकल्प ‘नित्य दान’ से जुड़ने का आह्वान भी किया।
शबरी प्रसंग और जटायु के धर्म पालन की चर्चा
नवोदित कथाकार कुमारी सृष्टि शुक्ला ने माता शबरी के पावन प्रसंग को अपनी कविताओं और मधुर भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो गए। वहीं, अपनी ओजस्वी शैली के लिए प्रसिद्ध बाल व्यास पंडित हरे कृष्ण शुक्ला ने जटायु के शौर्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जटायु ने अधर्म के विरुद्ध लड़ते हुए राष्ट्र और धर्म रक्षा का संदेश दिया। शुक्ला जी ने श्री राम मंदिर निर्माण के बलिदानियों को नमन करते हुए राष्ट्रभक्ति का संचार किया।
इस पांच दिवसीय आयोजन में आगामी दो दिनों तक इन्हीं विद्वान वक्ताओं के प्रवचन जारी रहेंगे। आयोजन को सफल बनाने में ठाकुर परिवार और समस्त ग्रामवासी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।





