Chhattisgarh

कागजों पर चमका जिला, हकीकत में बुनियादी सुविधाओं को तरसा मुंगेली


मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मानचित्र पर पृथक पहचान बनाने वाले मुंगेली जिले को अस्तित्व में आए करीब 14 वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी यहां का विकास फाइलों में ही सिमटा नजर आ रहा है। जिला बनने के समय जनता ने जिन बुनियादी सुविधाओं—जैसे चकाचक सड़कें, सुदृढ़ ड्रेनेज सिस्टम और स्वच्छ पेयजल—का सपना देखा था, वह आज भी एक अधूरी हकीकत बना हुआ है।

धूल से बेहाल व्यापारी: ‘सफेद’ हो रहे दुकान के सामान

​सड़कों की बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। उखड़ी हुई सड़कों से दिनभर उड़ने वाली धूल दुकानों के भीतर रखे सामानों पर जम रही है, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

  • व्यापार पर असर: धूल के कारण ग्राहक दुकानों में रुकने से कतराते हैं। कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और किराना व्यापारियों का कहना है कि सुबह सफाई करते हैं और घंटे भर में सब कुछ धूल धूसरित हो जाता है।
  • सेहत का संकट: दिन भर धूल के बीच बैठने के कारण व्यापारी और कर्मचारी दमा, एलर्जी और आंखों के संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।

बदहाल सड़कें और उफनती नालियां

​शहर के मुख्य मार्गों से लेकर वार्डों के अंदरूनी हिस्सों तक, उबड़-खाबड़ सड़कें आमजन की नियति बन चुकी हैं। कई मोहल्लों में स्थिति यह है कि नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बारिश में कीचड़ और गर्मी में धूल का गुबार—यह मुंगेली की स्थायी पहचान बनती जा रही है।

‘थूक-पालिश’ वाली मरम्मत से जनता में रोष

​स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन शिकायतों के बाद केवल खानापूर्ति करता है। गड्ढों को भरने के नाम पर की जाने वाली अस्थायी मरम्मत कुछ ही दिनों में उखड़ जाती है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों के पास स्थायी समाधान के लिए न तो कोई ठोस योजना है और न ही इच्छाशक्ति।

जवाबदेही पर सवाल: कहां गए विकास के दावे?

​एक जिला मुख्यालय होने के नाते मुंगेली में जिस स्तर की अधोसंरचना (Infrastructure) विकसित होनी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आती। जनप्रतिनिधियों की कथित उदासीनता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर टैक्स देने के बावजूद उन्हें नारकीय जीवन जीने को क्यों मजबूर होना पड़ रहा है?

जनआकांक्षाओं पर खरा उतरने की जरूरत

​मुंगेली जैसे उभरते जिले के लिए अब सुनियोजित विकास कार्यों और नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। पारदर्शी कार्यप्रणाली और समयबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। अब समय आ गया है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर ठोस कार्ययोजना तैयार करें, ताकि मुंगेली वास्तव में विकास की राह पर आगे बढ़ सके।


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Pritesh Arya

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