Chhattisgarh

मुंगेली: जिला बनने के 13 साल बाद भी विकास की डगर पथरीली, फाइलों में दफन हैं जनता की उम्मीदें


विशेष रिपोर्ट: जिला मुंगेली @ 13 वर्ष

प्रशासनिक सेटअप उधार का, बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी तरस रहे जिलेवासी; न रेल आई, न सिटी बसें चलीं।

मुंगेली |✍️छत्तीसगढ़ राज्य अपना 25वाँ स्थापना दिवस मनाने की तैयारी में है, लेकिन राज्य गठन के 13 साल बाद अस्तित्व में आए मुंगेली जिले की तस्वीर आज भी धुंधली है। 1 जनवरी 2012 को बिलासपुर से अलग होकर जिला बनने वाले मुंगेली को लेकर लोगों ने जो सपने संजोए थे, वे आज भी अधूरे हैं। 13 साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी यह जिला प्रशासनिक उपेक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण पिछड़ापन झेल रहा है।

कनेक्टिविटी का अभाव: न पटरी बिछी, न बसें चलीं

​आजादी के 78 साल बाद भी मुंगेली रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ पाया है। रेलवे सुविधा न होने से व्यापारिक और आर्थिक विकास पूरी तरह ठप है। वहीं, स्थानीय परिवहन का हाल यह है कि 6 साल पहले स्वीकृत हुई 4 सिटी बसें आज तक सड़कों पर नहीं उतरीं। केंद्र शासन द्वारा स्वीकृत ‘गौधा से कन्तेली-चातरखार’ बाईपास सड़क भी प्रशासनिक सुस्ती के कारण अधर में लटकी है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: पलायन की मजबूरी

​जिले में उच्च शिक्षा के लिए एक भी स्तरीय संस्थान नहीं है। इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज की कमी के कारण मेधावी छात्र बाहर जाने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है; यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक उपकरणों का भारी अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और भी दयनीय है।

प्रमुख मुद्दे जो बने हैं जी का जंजाल:

  • सड़कों का बुरा हाल: शहर की आंतरिक सड़कें और ग्रामीण मार्ग बारिश में दलदल बन जाते हैं।
  • सौंदर्यीकरण के नाम पर छलावा: जिला मुख्यालय होने के बावजूद चौक-चौराहों को छोड़ दें तो सौंदर्यीकरण कहीं नजर नहीं आता।
  • रोजगार का संकट: कृषि प्रधान जिला होने के बाद भी यहाँ कोई प्रोसेसिंग यूनिट या बड़े उद्योग स्थापित नहीं हुए।
  • बुनियादी ढांचा: आज भी 700 की आबादी वाले कुछ गांवों में प्राथमिक स्कूल तक नहीं है, जहाँ बच्चों को 2 किमी पैदल जाना पड़ता है।

घोषणाएं बनाम हकीकत

​वर्ष 2023 में प्रशासन ने 770 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात देने का दावा किया था, लेकिन धरातल पर बदलाव नगण्य है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिला बनने से केवल दफ्तरों की संख्या बढ़ी है, आम आदमी का जीवन स्तर नहीं सुधरा।

“जिला बनने के बाद हमें लगा था कि मुंगेली की किस्मत बदलेगी, लेकिन आज भी हम बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरे जिले हमसे आगे निकल गए और हम घोषणाओं के जाल में फंसे हैं।”मुंगेली जिले में भ्रष्टाचार हावी है

— स्वतंत्र तिवारी स्थानीय नागरिक

राजनैतिक दृष्टिकोण से मुंगेली सशक्त होकर भी घुटने के बल चलने पर विवश है, बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ साथ आरक्षित जिले को मेडिकल कालेज की शिक्षा के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए

आकाश दत्त मिश्रा स्थानीय नागरिक

निष्कर्ष

प्रशासनिक उदासीनता और बजट का सही क्रियान्वयन न होना मुंगेली के पिछड़ने का मुख्य कारण है। यदि समय रहते ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई, तो मुंगेली केवल नक्शे पर एक प्रशासनिक केंद्र बनकर रह जाएगा, विकास का मॉडल कभी नहीं बन पाएगा।


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Pritesh Arya

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