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सावन का पवित्र महीना आज से शुरू, कैसे करें भगवान शिव की पूजा जानिये


 सावन मास, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का सबसे आध्यात्मिक, पुण्यदायक और शिव तत्‍व से भरपूर महीना है। यह संपूर्ण मास भगवान शिव की विशेष आराधना, व्रत, जप, और साधना के लिए समर्पित होता है। श्रावण मास में प्रकृति अपनी हरियाली से जीवन में ऊर्जा भरती है, और मनुष्य अपने मन, वचन और कर्म से भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करता है। यह समय केवल धार्मिक अनुष्ठानों का नहीं, बल्कि आत्म-संयम, सात्त्विक जीवनशैली और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव की पूजा करने से व्यक्ति को भगवान शंकर की कृपा, चिंतन में स्थिरता, कर्म में सफलता, तथा जीवन में आरोग्यता और संतुलन प्राप्त होता है।

नीचे दिए गए सावन के नियमों का पालन करके आप भगवान शिव को प्रसन्‍न कर सकते हैं और सावन के महीने में शिव तत्‍व का लाभ प्राप्‍त कर सकते हैंर वर्ष भोलेनाथ या कहें महादेव के भक्तों को श्रावण मास यानी सावन का बेसब्री से इंतजार रहता है. शास्त्रों के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय है. सावन के महीने का हर दिन, विशेष रूप से सावन के सभी सोमवार और 16 सोमवार के खास दिन भगवान शिव की पूजा-उपासना करने से जीवन की हर समस्या का निवारण मिलता है. साथ ही, सावन में महादेव के नाम का जप करने से भी जीवन में शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि इस महीने में भगवान शिव अपने हर भक्त की सभी तरह की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं.

सावन में क्या करें

  • रोज प्रातः स्नान कर शिव पूजा करें। बेलपत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • सावन के सभी सोमवार को उपवास रखें, यह भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। सोलह सोमवार व्रत भी शुभ फल देता है।
  • सावन में हरी वस्तुओं का प्रयोग करें। महिलाएं हरी चूड़ियां, हरी साड़ी, हरा बिंदी आदि पहनें। हरी सब्जियां, तुलसी और बेलपत्र का सेवन करें।
  • सावन में सात्त्विक आहार लें। सावन में फलाहार करें। हल्दी, जीरा, सेंधा नमक जैसे शुद्ध मसालों का प्रयोग करें।
  • पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जप शिव कृपा को आकर्षित करता है।
  • ब्राह्मण और जरूरतमंदों को दान दें। अन्न, वस्त्र, जल, छाता, गौ-सेवा, तुलसी, धार्मिक पुस्तकें दान करें।
  • कांवड़ियों का स्वागत करें। शिवभक्त कांवड़ियों को जल, भोजन या सहायता देना अत्यंत पुण्यदायक होता है।

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Pritesh Arya

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