सेंट्रल बैंक मुंगेली में ₹26.87 लाख की हेराफेरी: बिना प्रशासनिक अनुमति के सरकारी मद से उड़ाए पैसे

अधोसंरचना मद के खाते में सेंध: बैंक कर्मचारी ने अपने और परिचित के खाते में ट्रांसफर की राशि, बैंक प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध
मुंगेली | प्रितेश अज्जू आर्य खास खबर ✍️
जिले में शासकीय धन की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में कलेक्ट्रेट के ‘अधोसंरचना मद’ से 26 लाख 87 हजार रुपये का अनधिकृत ट्रांजेक्शन किया गया है। मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक गलियारों और बैंकिंग जगत में हड़कंप मच गया है। इस गबन ने बैंक की आंतरिक सुरक्षा और निगरानी प्रणाली की कलई खोलकर रख दी है।
कैसे हुआ खेल: तीन ट्रांजेक्शन में साफ की रकम
सूत्रों के मुताबिक, इस हेराफेरी को बैंक के ही एक कर्मचारी ने अंजाम दिया। कुल राशि को तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ठिकाने लगाया गया:
- ₹8.50 लाख: सीधे बैंक कर्मचारी के निजी खाते में ट्रांसफर किए गए।
- ₹18.37 लाख: मंजूलता पटेल नामक एक अन्य खाते में भेजे गए।
हैरानी की बात यह है कि शासकीय खातों से निकासी के लिए आवश्यक उच्च स्तरीय सत्यापन और प्रशासनिक स्वीकृति (नोट शीट) के बिना ही इतनी बड़ी रकम कैसे पार हो गई?

बैंक प्रबंधन के ‘टालमटोल’ से गहराया शक
मामला खुलने पर जिला प्रशासन ने बैंक प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, लेकिन बैंक की ओर से अब तक न तो संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया है और न ही खातों का पूरा स्टेटमेंट उपलब्ध कराया गया है। बैंक अधिकारियों का यह टालमटोल वाला रवैया उनकी भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
रुपये तो लौट आए, पर कार्रवाई तय
फजीहत होते देख गबन की गई पूरी राशि वापस अधोसंरचना मद के खाते में जमा करा दी गई है। हालांकि, प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि केवल राशि लौटा देने से अपराध कम नहीं हो जाता। बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और शासकीय धन के दुरुपयोग को लेकर बैंक पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
“प्रकरण उजागर होने के बाद राशि वापस जमा करा दी गई है, लेकिन बैंक और कर्मचारियों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई है। हम विस्तृत विवरण और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। पुष्टि होते ही आर्थिक दंड और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
— जी.एल. यादव, अतिरिक्त कलेक्टर, मुंगेली
आम जनता में असुरक्षा का भाव
सरकारी खाते में हुई इस सेंधमारी ने आम खाताधारकों को भी डरा दिया है। लोगों का कहना है कि जब कलेक्ट्रेट का पैसा बैंक कर्मचारी की पहुंच से सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की जमा पूंजी कितनी सुरक्षित होगी?





