मुंगेली नगर पालिका: PIC गठन की ‘हैट्रिक’ पर भी संकट के बादल, विकास कार्यों से ज्यादा इस्तीफों की चर्चा

मुंगेली। मुंगेली नगर पालिका में तालमेल की कमी अब शहर के विकास पर भारी पड़ने लगी है। प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) गठन को लेकर चल रहा तमाशा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। दो बार के असफल प्रयासों और इस्तीफों के दौर के बाद अब तीसरी बार PIC गठन की कवायद शुरू हुई है, लेकिन इस बार भी स्थिति सामान्य नजर नहीं आ रही है।
दो बार की विफलता के बाद तीसरी कोशिश
नगर पालिका के इतिहास में यह संभवतः पहला मौका है जब PIC गठन की प्रक्रिया तीसरी बार दोहराई जा रही है। इससे पहले दो बार अध्यक्ष द्वारा सूची जारी की गई, लेकिन दोनों ही बार पार्षदों के असंतोष और सामूहिक इस्तीफों ने गठन की प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया। बार-बार होती इस उठापटक ने पालिका की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

कुर्सी की खींचतान में जनता पस्त
एक तरफ पालिका के गलियारों में सभापतियों की सूची को लेकर खींचतान जारी है, वहीं दूसरी तरफ शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। वार्डों में:
- पेयजल संकट: गर्मी की आहट से पहले ही नलों में पानी का दबाव कम हो गया है।
- सफाई व्यवस्था: नालियां बजबजा रही हैं और कचरा प्रबंधन भगवान भरोसे है।
- अंधेरे में वार्ड: स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है।
जनता का कहना है कि जिम्मेदार लोग विकास कार्यों के बजाय केवल फोटो सेशन और आपसी बयानबाजी में व्यस्त हैं।
वरिष्ठ पार्षदों के कड़े रुख और सीएमओ की स्पष्ट प्रतिक्रिया
ताजा मामले में अध्यक्ष ने तीसरी बार सूची पालिका अधिकारी को सौंपी है। हालांकि, वरिष्ठ पार्षदो के कड़े रुख ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि दो बार इस्तीफों की भेंट चढ़ चुकी इस प्रक्रिया को अब पूरी सावधानी से परखा जा रहा है। नियमानुसार जांच के बाद ही इसकी जानकारी दी जाएगी
निष्कर्ष: कागजों पर विकास या सियासी अखाड़ा
नगर पालिका में चल रहा यह ‘इस्तीफा-इस्तीफा’ का खेल अब आम लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। सवाल यह है कि जब तीसरी बार भी दिग्गज पार्षद असंतुष्ट हैं, क्या मुंगेली की जनता को धूल, गड्ढे और अंधेरे से निजात मिलेगी या फिर यह कार्यकाल भी केवल सियासी अखाड़ा बनकर रह जाएगा।





