मुंगेली का ऐतिहासिक पल: स्व. विपनेश सिंह का सपना और आनंद वल्लभ का नेतृत्व लाया रंग, 30 साल बाद थमा इंतज़ार।

मुंगेली। मुंगेली के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में 4 अप्रैल का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। नगर के हृदय स्थल ‘पड़ाव चौक’ में शौर्य, वीरता और स्वाभिमान के शाश्वत प्रतीक शिरोमणि महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिमा का भव्य आगमन होने जा रहा है। यह आयोजन क्षत्रिय समाज के तीन दशकों के लंबे इंतजार, सतत संघर्ष और अटूट संकल्पों की एक गौरवशाली परिणति है।
1995 में पड़ा था संकल्प का बीज
इस ऐतिहासिक यात्रा की नींव आज से ठीक 30 वर्ष पूर्व, वर्ष 1995 में रखी गई थी। क्षत्रिय समाज के तत्कालीन दूरदर्शी अध्यक्ष स्वर्गीय विपनेश सिंह परिहार ने समाज के गौरव को पुनर्स्थापित करने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने ही सबसे पहले तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष अनिल सोनी के समक्ष पड़ाव चौक का नामकरण “महाराणा प्रताप चौक” करने और वहां प्रतिमा स्थापित करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा था।
विरासत और नेतृत्व का अद्भुत समन्वय
स्व. परिहार द्वारा बोया गया वह संकल्प का बीज, आज वर्तमान अध्यक्ष आनंद वल्लभ सिंह के ऊर्जावान नेतृत्व में वटवृक्ष बनकर साकार हो रहा है। आनंद वल्लभ सिंह के निरंतर परिश्रम और प्रशासनिक समन्वय का ही परिणाम है कि दशकों पुरानी यह मांग अब धरातल पर उतर रही है। यह सफर 1995 से 2025 तक की उस वैचारिक निरंतरता का है, जिसने समाज की कई पीढ़ियों को एकजुट रखा। जहाँ स्व. परिहार ने विपरीत परिस्थितियों में मशाल जलाई, वहीं आनंद वल्लभ सिंह ने उस विरासत को सिद्धि तक पहुँचाकर पूर्वजों के सपनों को पूर्णता प्रदान की।
तैयारियों में जुटा समाज, पूर्वजों को दी श्रद्धांजलि
प्रतिमा के आगमन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता— जिनमें शिवप्रताप सिंह, उमाकांत सिंह, गजानंद सिंह, हरिकपुर सिंह, नागेश्वर सिंह, गोकुलेश सिंह, संतोष सिंह, राजू सिंह एवं वंशराज सिंह शामिल हैं— आयोजन को भव्य बनाने में जुटे हुए हैं। इस अवसर पर सभी सदस्य स्व. विपनेश सिंह परिहार के योगदान को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित कर रहे हैं।
प्रेरणा का केंद्र बनेगा पड़ाव चौक
मुंगेली का पड़ाव चौक अब केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए वीरता और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा का केंद्र बनेगा। पूरा नगर इस गौरवशाली क्षण का साक्षी बनने के लिए आतुर है। यह आयोजन संदेश देता है कि जब समाज का नेतृत्व संकल्पबद्ध हो और पूर्वजों की विरासत का सम्मान वर्तमान की कर्मठता से मिल जाए, तो दशकों पुराने सपने भी हकीकत बन जाते हैं।





