गंदे पानी और उपेक्षा से जूझ रहा शंकर मंदिर तालाब, अस्तित्व पर संकट

मुंगेली। नगर के हृदय स्थल शंकर मंदिर स्थित ऐतिहासिक तालाब आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी यह तालाब नगरवासियों की जीवन रेखा माना जाता था, जहां हजारों लोग नहाने, जल उपयोग और पीने के पानी के लिए निर्भर रहते थे, वहीं अब इसकी स्थिति दयनीय हो चली है।आज यह तालाब गंदे पानी और अतिक्रमण के बोझ से कराह रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तालाब में अब महज दो से दस लोग ही नहाने आते हैं। कभी स्वच्छ और आबाद रहने वाला यह जलाशय अब घरों के गंदे पानी का ठिकाना बन चुका है।तालाब में आने-जाने का रास्ता भी सिकुड़ गया है। यदि शीघ्र ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह तालाब मैदान में बदलने में देर नहीं लगेगी। जल संरक्षण पर सरकार की बातें केवल कागजों तक सीमित होती दिख रही हैं
नगर के हृदय स्थल में स्थित यह तालाब हालांकि सार्वजनिक उपयोग में आता है।लेकिन ये तालाब निजी स्वामित्व के अधीन होने के चलते प्रशासन इसके जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण नहीं कर पा रहा है यही वजह है कि ये तालाब अब धीरे धीरे अपना अस्तित्व खो रहा है गंदी नालियों का पानी जाने से रोका जाए ताकि नगर की धरोहर को बचा सके
, जबकि यह तालाब नगर की धरोहर है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी प्रशासन की भी है।नगरवासियों का कहना है शंकर मंदिर तालाब की सफाई और पुनर्जीवन के कार्य को प्राथमिकता दी जाए, ताकि यह नगर की परंपरा और पहचान बनी रह सके




