Chhattisgarh

ऑनलाइन सट्टे की गिरफ्त में मुंगेली की युवा पीढ़ी: मैदान पर चौके-छक्के, मोबाइल पर उजड़ रही जिंदगी।


मुंगेली। शांतिप्रिय मुंगेली शहर इन दिनों एक खतरनाक सामाजिक बुराई की चपेट में है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर चाय की गुमटियों तक, युवाओं के हाथ में मोबाइल अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सट्टेबाजी का हथियार बन गया है। क्रिकेट के प्रति दीवानगी का फायदा उठाकर सट्टा किंग और बुकीज ने शहर के युवाओं को सट्टे की ऐसी लत लगा दी है कि कई परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।

हाईटेक हुआ सट्टे का कारोबार

​पुराने समय में सट्टा पर्चियों पर चलता था, लेकिन अब यह पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। ‘महादेव बुक’ जैसे दर्जनों अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से मुंगेली के युवाओं को आईडी (ID) बांटी जा रही है। शहर के कुछ रसूखदार सफेदपोश लोग पर्दे के पीछे से इस काले खेल को संचालित कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आईपीएल, टी-20 वर्ल्ड कप और यहां तक कि छोटे घरेलू मैचों पर भी हर दिन लाखों-करोड़ों का दांव लगाया जा रहा है।

कर्ज और अपराध की ओर बढ़ते कदम

​सट्टे की इस लत ने युवाओं के मनोविज्ञान को बुरी तरह प्रभावित किया है। शुरुआत में छोटे मुनाफे का लालच देकर उन्हें फंसाया जाता है, जिसके बाद हार का सिलसिला शुरू होता है। इस हार की भरपाई के लिए युवा अपने घर के गहने बेचने, दोस्तों से कर्ज लेने और यहां तक कि चोरी जैसी वारदातों को अंजाम देने से भी नहीं चूक रहे हैं। शहर में पिछले कुछ महीनों में बढ़ी छोटी-मोटी चोरियों और आपसी विवादों के पीछे सट्टे का लेन-देन एक मुख्य कारण बनकर उभरा है।

“युवाओं में सट्टे की बढ़ती लत चिंता का विषय है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर नजर रखें। अचानक खर्च बढ़ना या व्यवहार में चिड़चिड़ापन सट्टे के दलदल की ओर संकेत हो सकता है।”

— विनय चोपड़ा वरिष्ठ पार्षद

पड़ताल की कुछ मुख्य बातें:

  • टारगेट ग्रुप: 18 से 30 वर्ष के छात्र और बेरोजगार युवा।
  • लेन-देन का तरीका: पूरी तरह डिजिटल (UPI और बैंक ट्रांसफर)।
  • नेटवर्क: बड़े शहरों के बुकीज से जुड़े हैं स्थानीय एजेंट।

प्रशासन सक्रिय 

मुंगेली के प्रबुद्ध नागरिकों ने कहा है प्रशासन बहुत ही सक्रिय है लगातार कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन इस ऑनलाइन क्रिकेट की सट्टेबाजी  से कैसे राहत मिले और साइबर सेल से मांग की है कि ऑनलाइन सट्टा खिलाने वाली आईडी और उनके संचालकों पर नकेल कसी जाए, ताकि शहर के भविष्य को अंधकार में जाने से बचाया जा सके।


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Pritesh Arya

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