मुंगेली में साहित्यिक कार्यशाला, स्व. केदार सिंह परिहार को दी गई श्रद्धांजलि
लेखन, प्रस्तुतीकरण और साहित्यिक अभिव्यक्ति पर केंद्रित रहा तीन सत्रों का आयोजन

मुंगेली। लेखन और वाचन में भाषा की शुद्धता, शब्द-संपदा, साहित्यिक शैली तथा अभिव्यक्ति को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कवि संगम जिला इकाई मुंगेली और आगर साहित्य समिति मुंगेली के संयुक्त तत्वावधान में होटल पुनीत में साहित्यिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिले के लोकप्रिय कवि स्वर्गीय केदार सिंह परिहार को समर्पित रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ। स्वागत भाषण में आगर साहित्य समिति के अध्यक्ष देवेंद्र परिहार ने बताया कि समिति नियमित रूप से काव्यगोष्ठियों का आयोजन करती है और इस बार साहित्यकारों के लिए उपयोगी कार्यशाला की पहल की गई है।
राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय महामंत्री महेश कुमार शर्मा ने युवाओं को कविता लेखन व प्रस्तुतीकरण के माध्यम से देशभक्ति, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक समरसता से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने छत्तीसगढ़ी लेखन की शुद्धता पर मार्गदर्शन दिया। वरिष्ठ साहित्यकार विजय राठौर ने सजल लेखन की बारीकियों को विस्तार से बताया।
पहले सत्र का संचालन रामा साहू ने किया और आभार प्रदर्शन अशोक गुप्ता ने किया।
दूसरे सत्र का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पांडे, जनपद अध्यक्ष रामकमल सिंह परिहार, वरिष्ठ कवि मीर अली मीर और संस्कृति कर्मी आशीषराज सिंघानिया की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर श्रीकांत पांडे ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है। मीर अली मीर ने मंचीय कविता की प्रस्तुति कला के व्यावहारिक पक्षों की जानकारी दी और आशीषराज सिंघानिया ने साहित्य में मीडिया व मार्केटिंग के महत्त्व को रेखांकित किया।
इस सत्र में ‘दस्तक’ हेतु प्रदेशभर से आए चयनित कवियों ने काव्यपाठ भी किया।
तीसरे सत्र में जांजगीर, मुंगेली, बिलासपुर, कवर्धा, बेमेतरा और बलौदा बाजार से आए कवियों ने काव्यपाठ प्रस्तुत किया। कार्यशाला का समापन स्व. केदार सिंह परिहार को श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ हुआ।
आयोजन को सफल बनाने में जेठमल कोटडिया, अशोक गुप्ता, नंदराम यादव, जगदीश देवांगन, देवेंद्र परिहार, महेंद्र यादव, देव गोस्वामी, कमल सोनी, राकेश गुप्त निर्मल, स्वतंत्र तिवारी, रामा साहू समेत कई साहित्यकारों का विशेष सहयोग रहा।





