रायपुर/मुंगेली:छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मुंगेली नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष रोहित शुक्ला की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने उन्हें एक औपचारिक “कारण बताओ नोटिस” जारी कर 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41-क के तहत पद से हटाने जैसी एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?
शासकीय पत्र के अनुसार, नगर पालिका के आम चुनाव के बाद 7 मार्च 2025 को अध्यक्ष और पार्षदों ने शपथ ली थी। उसी दिन अध्यक्ष द्वारा ‘प्रेसीडेंट-इन-कौंसिल’ (PIC) के सदस्यों का मनोनयन किया गया था। हालांकि, राजनीतिक खींचतान के चलते सदस्य बार-बार इस्तीफा देते रहे:
- पहली बार: मार्च 2025 में 03 सदस्यों ने इस्तीफा दिया।
- दूसरी बार: जनवरी 2026 में पुनः मनोनयन हुआ, लेकिन 03 सदस्यों ने फिर इस्तीफा दे दिया।
- तीसरी बार: 27 जनवरी 2026 को फिर से सदस्यों को मनोनीत किया गया।
आरोप: दायित्वों के निर्वहन में चूक

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रेसीडेंट-इन-कौंसिल का विधिवत गठन होने के बावजूद, अध्यक्ष द्वारा आज दिनांक तक एक भी बैठक आहूत नहीं की गई है। विभाग ने इसे पदेन दायित्वों के निर्वहन में गंभीर चूक और नगर पालिका अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन माना है।
15 दिनों की मोहलत
नगरीय प्रशासन विभाग के उप सचिव द्वारा हस्ताक्षरित इस नोटिस में कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर साक्ष्यों सहित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि अध्यक्ष को इस विषय में कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में विभाग उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय दंडात्मक कार्रवाई करेगा, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं अध्यक्ष की होगी।
इस नोटिस के बाद मुंगेली की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें अध्यक्ष द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

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