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7–8 सितंबर को भारत में लगेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण: जानिए कारण, समय और धार्मिक महत्व

7 सितंबर दोपहर 12:57 बजे से लगेगा सूतक काल


7 सितंबर 2025 की रात को भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण रात 09:57 बजे शुरू होकर 8 सितंबर की सुबह 01:26 बजे तक रहेगा। इस चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग में देखने को मिलेगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है। यह खगोलीय घटना भाद्रपद पूर्णिमा के दिन घटित हो रही है और भारत के अलावा एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी इसे देखा जा सकेगा। करीब 85% विश्व की आबादी इस चंद्र ग्रहण को देखकर आकाशीय दृश्य का आनंद ले सकेगी।

चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक कारण

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसके कारण चंद्रमा पर सूर्य की किरणें सीधे नहीं पड़ पातीं, इसलिए चंद्रमा का प्रकाश अंधेरा हो जाता है। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है क्योंकि पृथ्वी की वायुमंडलीय परत सूर्य की लाल किरणें चंद्रमा तक पहुंचने देती है, जिससे चंद्रमा का रंग बदल जाता है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाते हैं।

सूतक काल का महत्व और समय

चंद्र ग्रहण लगने से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जो धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अशुभ माना जाता है। सूतक काल इस बार 7 सितंबर 2025 को दोपहर 12:57 बजे से आरंभ होगा और पूरा ग्रहण समाप्त होने के बाद ही खत्म होगा। इस काल में पूजा, भोजन और शुभ कार्यों से विरत रहने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय देवता भी कष्ट में होते हैं और मंदिरों के कपाट बंद रहिते हैं।

सूतक काल में क्या करें और क्या न करें

सूतक काल में भोजन न बनाना, अन्य धार्मिक अनुष्ठान न करना और घर में संयम बनाए रखना चाहिए। लेकिन भगवान के नाम का जप करना और शास्त्रोक्त विधान से ध्यान-भजन करते रहना शुभ होता है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी इस काल में विशेष सावधानियां और छूटें निर्धारित हैं ताकि वे सुरक्षित रहें।

ग्रहण का धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

धार्मिक रूप से ग्रहण को शुभ कार्यों के लिए विपरीत समय माना जाता है। सामाजिक रूप से इससे अनुशासन का पालन और सामूहिक चेतना बढ़ती है। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण के दौरान प्राकृतिक ऊर्जा में बदलाव होता है, जिसके कारण सूतक काल में संक्रमण और नकारात्मक प्रभावों से बचाव के उपाय बनाए जाते हैं।

यह चंद्र ग्रहण 2025 का आखिरी और अंतिम होगा, जिसे छोड़ देने का विकल्प नहीं है क्योंकि यह अद्भुत खगोलीय दृष्टि का अनुभव कराता है और आस्था व साधना का अवसर भी प्रदान करता है।


इस प्रकार, 7-8 सितंबर की रात को पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत सहित कई हिस्सों में देखा जाएगा, जिसमें सूतक काल की पवित्रता और नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होगा।


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Pritesh Arya

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