*बड़े- बुजुर्ग जीवन के अनमोल खजाना:- अशोक चंद्राकर*

लोरमी-: आज अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर ग्राम जोतपुर तहसील लोरमी में पहली बार वृद्धजन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया ।

सर्वप्रथम गांव की सभी वरिष्ठ नागरिकों के पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक चंद्राकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता,कार्यक्रम के अध्यक्षता रणजीत सिंह ठाकुर पूर्व जिलाध्यक्ष सरपंच संघ मुंगेली,अतिविशिष्ट अतिथि अशोक टोंडे प्रधान पाठक शासकीय प्राथमिक शाला सेनगुंडा,कार्यक्रम के आयोजक आरती त्रिलोक कोशले सरपंच ग्राम पंचायत जोतपुर,भुनेश्वर रावल,पंच फागू डहरिया पंच, रामकुमार साहू पंच,रेशम कोशले पंच शिवदयाल यादव पंच,हीरा बाई डहरिया पंच,सूरज कुर्रे पंच सतनारायण बघेल पंच, सुरजीत यादव पंच ने सभी वरिष्ठ जन क्रमश: परदेशी घृतलहरे,श्यामलाल खांडेकर वरिष्ठ समाज सेवी,त्रिवेणी खांडेकर ग्राम पंचायत जोतपुर के प्रथम सरपंच, मनराखन कुर्रे,बुध्दु टंडन,दल्ले यादव,अमरु कोशले,तितरा बांधे,कुंजलाल बंजारा,झुमका कुर्रे, अघनूराम अनंत,लतेल कोशले,दशरथ कुर्रे,मालिक निषाद,कन्हैया मोहले,धनुक यादव,सहिबा कुर्रे,श्याम लाल कुर्रे,उमेंद बाई कोशले,तुलसी रात्रे,सफुरा कुर्रे,पंचबाई चतुर्वेदी,सुखबाई कामले,इतवारा कोशले,रामफूल कुर्रे,सुंदरी कुर्रे,गीताबाई कोशले,कलेशिया बाई कोशले,बुंदकुवर बांधे,बासन बाई,घृतलहरे,सुमिंत्रा डहरिया,सहोदरा घृतलहरे,कुमारी निषाद,हरकुन घृतलहरे,तीजन पाटले,सुहावन यादव,तुलसी,सुहागबाई कांत,गौरी बाई कुर्रे,दशमत खांडेकर,अंजोरिया डहरिया एवं अन्य वरिष्ठ जनों के पानी और दूध से चरण धोकर एवं साल, श्रीफल,फूल माला,तिलक बैच लगाकर स्वागत सम्मान किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के आसंदी से अशोक चंद्राकर ने कहा कि बड़े-बुजुर्ग जीवन का अनमोल खज़ाना होते हैं, जो अपने अनुभव, ज्ञान और समझदारी से परिवार को एक मजबूत आधार देते हैं और सही दिशा दिखाते हैं।
वे बच्चों को संस्कार देते हैं,घर में अनुशासन बनाए रखते हैं और मुश्किल समय में एक भरोसेमंद सलाहकार के रूप में काम करते हैं. बड़ों का सम्मान परिवार और समाज में एक सकारात्मक वातावरण बनाता है, जिससे सभी सदस्यों का नैतिक और भावनात्मक विकास होता है। इत्यादि बातें कहे।
अशोक टोंडे ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का उद्देश्य केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है,बल्कि यह समाज में वृद्धजनों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की भावना को विकसित करने का एक प्रयास है। आज के दौर में,जब सामाजिक परिवर्तन और आधुनिक जीवनशैली के कारण परिवारों में वृद्धजनों के प्रति संवेदनशीलता में कमी आई है, ऐसे आयोजन उनकी गरिमा को बनाए रखने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वृद्धजनों का समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान है उक्त बात कहे।
कार्यक्रम आयोजक सरपंच आरती त्रिलोक कोशले ने स्वागत भाषण में कहा की भारतीय संस्कृति में सदा से ही बड़ों के आदर-सम्मान की परम्परा रही है लेकिन आज दुनिया के अन्य देशों सहित हमारे देश में भी वृद्धजनों पर बढ़ते अत्याचारों की खबरें समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। अधिकांश परिवारों में वृद्ध जिस तरह की उपेक्षा झेलने को मजबूर हैं उससे ज्यादा पीड़ादायक और क्या हो सकता है। समृद्ध परिवार होने के बावजूद घर के बुजुर्ग वृद्धाश्रमों में जीवनयापन करने को विवश हैं। बहुत से मामलों में बच्चे ही उन्हें बोझ मानकर वृद्धाश्रमों में छोड़ आते हैं। हालांकि यह उम्र का ऐसा पड़ाव होता है जब उन्हें परिजनों के अपनेपन, प्यार और सम्मान की सर्वाधिक जरूरत होती है। एक व्यक्ति जिस घर-परिवार को बनाने में अपनी पूरी जिंदगी खपा देता है, वृद्धावस्था में जब उसी घर में उसे अवांछित वस्तु के रूप में देखा जाने लगता है तो लगता है जैसे उस घर में रहने वालों की इंसानियत और उनके संस्कार मर चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद देशभर में वृद्धाश्रमों में बढ़ती संख्या इस तथ्य को इंगित करती है कि भारतीय समाज में वृद्धों को उपेक्षित किया जा रहा है। इत्यादि बातें कही।
कार्यक्रम को श्याम लाल खांडेकर,अजीत घृतलहरे, भुनेश्वर रावल,हेमंत खांडेकर,रोहित कुर्रे,विजय कामले,शिव कोशले, संतोष यादव,रामेश्वर साहू एवं अन्य लोगों ने संबोधित किए।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अशवा अनंत,पोरेंद्रपाल डहरिया,ओमप्रकाश चतुर्वेदी,गोपाल बांधे,ज्योतिष कोशले ठाकुर कोसले,मेलन यादव,रामधुन साहू,कमल साहू,मंगल टंडन सैकड़ो की संख्या में लोग उपस्थित रहे।





