गौठान बंद, अब गौधाम शुरू होंगे… चरवाहों को 11 हजार, गौसेवक को 13 हजार मिलेंगे

रायपुर ✍️कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई गौठान योजना के स्थान पर अब भाजपा सरकार ने गौधाम योजना शुरू की है। इस के ड्राफ्ट को वित्त और विभाग से भी मंजूरी मिल गई है। इसमें चरवाहों को मानदेय देने के साथ ही मवेशियों को चारे के लिए प्रतिदिन के हिसाब से एक तय राशि दी जाएगी। उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले हर पशु के लिए पहले वर्ष 10 रुपए प्रतिदिन, दूसरे वर्ष-20 रुपए प्रतिदिन, तीसरे वर्ष-30 रुपए प्रतिदिन और चौथे वर्ष-35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्ते तय कर दी गई हैं। चरवाहे को 10916 रुपए प्रतिमाह मानदेय तय कर दिया गया है। इसी तरह गौ सेवक को प्रतिमाह 13,126 रुपए मिलेंगे।
पशुधन विकास विभाग ने योजना का ड्राफ्ट जिलों में भी भेज दिया है। दरअसल, अवैध रूप से पशुओं की तस्करी एवं परिवहन पर रोक है। अंतरराज्यीय सीमाओं पर अवैध पशु तस्करी पर गृह विभाग कार्यवाही करते हुए गौवंशीय पशु जब्त करता है। इन पशुओं और घुमंतू पशुओं को रखने के लिए यह योजना शुरू की गई है। प्रत्येक गौधाम में क्षमतानुसार (अधिकतम 200) गौवंशीय पशु रखे जा सकेंगे।
दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ में सड़कों पर गायों की मौतों को संज्ञान में लेते हुए हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि पिछले एक हफ्ते में तीन हादसों में 90 गायों की मौत हो गई। बिलासपुर रोड पर 18 गायों की मौतों पर मुख्य सचिव ने भी कलेक्टर और एसपी से नाराजगी जाहिर की थी।
जहां सब सुविधाएं, उन सरकारी भूमि में संचालित होंगे गौधाम
ऐसी शासकीय भूमि जहां सुरक्षित बाडा, पशुओं के शेड, पर्याप्त पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं गौधाम की स्थापना की जाएगी। ऐसे गौठान जहां पहले से अधोसंरचना विकसित है, वहां उपलब्धता के आधार पर गौठान से लगे हुए चारागाह की भूमि को हरा चारा उत्पादन के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा आस-पास की पंजीकृत गैशाला की समिति द्वारा गौधाम संचालन हेतु असहमति व्यक्त करने पर अन्य स्वयंसेवी संस्था एनजीओ, ट्रस्ट तथा संचालन हेतु आवेदन किया जा सकेगा। फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी, सहकारी समिति द्वारा गौधामगांव की समिति द्वारा संचालित समिति को प्रतिमाह 10 हजार रुपए मानदेय सरकारी स्तर पर 2 रुपए/किलो के दर से गोबर खरीदी, चरवाहा को मानदेय समिति देती थी गौठान में घुमंतू के साथ ही गांव के पशुओं को रखने का प्रावधान था गौठान में केंचुआ खाद और मुर्गी पालन का प्रावधान था।
यह होगी प्रक्रिया जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जो पंजीकृत गौशालाओं से भिन्न होंगे। पहले चरण में छत्तीसगढ़ की प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों का तुलनात्मक अध्ययन कर चयनित संस्था का नाम छ.ग. राज्य गौसेवा आयोग को भेजेगी। मंजूरी के बाद चयनित संस्था एवं आयोग में करार होगा। फिर उक्त संस्था को संचालन सौंपा जाएगा।
स्वतः बंद हो गई थी योजना | कांग्रेस सरकार ने गौठान योजना केलिए कोई बजट प्रावधान नहीं किया था। जिला स्तर पर डीएमएफ, सौर सुजला, मनरेगा, 14-15वें वित्त, पंचायत निधि जैसी 24 योजनाओं के बजट को इसमें लगाया जाता था। तब 1175 करोड़ रुपए गौठान पर खर्च किए थे। भाजपा सरकार आने के बाद कागजों में योजना न होने की वजह से कोई बजट प्रावधान रखा ही नहीं गया।
गौधामः गोबर खरीदी नहीं हो सकेगी
निराश्रित, घुमन्तू गौवंशीय पशुओं को ही रखा जाएगा। गौवंशीय पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन। गौधाम के संचालन में गौ शालाओं को प्राथमिकता चरवाहे को नियमित मानदेय सरकार देगी। गौधाम को वहां रहने वाले पशुओं के आधार पर राशि दी जाएगी। गोबार खरीदी नहीं होगी, उसका उपयोग चरवाहा ही करेगा।
गौधाम का उद्देश्य
गौवंशीय पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन।
गौ उत्पादों को बढ़ावा देना।
चारा विकास कार्यक्रम विकसित करना।
प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करना।
रोजगार उपलब्ध कराना।
फसलों के नुकसान के साथ ही दुर्घटनाओं में पशु और जन हानि से बचाव।





