मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। क्षेत्र की सुप्रसिद्ध और ममता की प्रतिमूर्ति मानी जाने वाली ‘कली दाई’ का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। कली दाई केवल एक नाम नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए उम्मीद और विश्वास का प्रतीक थीं।
70 वर्षों का निस्वार्थ सफर
कली दाई ने अपने जीवन के लगभग 70 साल मानवता की सेवा में समर्पित कर दिए। जब स्वास्थ्य सुविधाएं आज की तरह उन्नत नहीं थीं, तब उन्होंने अपनी कुशलता और अनुभव से हजारों बच्चों का सुरक्षित प्राकृतिक प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) कराया। मुंगेली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोग उन्हें किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से कम नहीं मानते थे।
प्राकृतिक प्रसव की विशेषज्ञ
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी औपचारिक डिग्री या आधुनिक मशीनों के, कली दाई ने हजारों प्रसव बड़ी ही सुगमता से कराए। उनके हाथों के स्पर्श में वह जादू था कि जटिल से जटिल मामले भी सामान्य हो जाते थे। क्षेत्र के कई घरों में तो दादा, पिता और पोते—तीनों पीढ़ियों का जन्म कली दाई के हाथों ही हुआ है।
सेवा भावना की मिसाल
कली दाई ने कभी भी सेवा को व्यापार नहीं बनाया। आधी रात हो या कड़कड़ाती ठंड, एक बुलावे पर वह सेवा के लिए तत्पर रहती थीं। 96 वर्ष की आयु में भी उनका हौसला और सेवा भाव कम नहीं हुआ था।
उनके निधन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि कली दाई भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हजारों बच्चों की मुस्कान में वे हमेशा जीवित रहेंगी।
सादर श्रद्धांजलि: ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को

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