रायपुर/कोरिया:
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोरिया अग्निकांड मामले में न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ी जीत सामने आई है। राजपूत क्षत्रिय समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा लंबे समय से की जा रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को आखिरकार शासन-प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। सरकार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आधिकारिक तौर पर सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

चेतावनी और जमीनी संघर्ष का दिखा असर
इस बड़े फैसले के पीछे श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना द्वारा शासन-प्रशासन को दी गई कड़ी चेतावनी और लगातार बनाए गए दबाव को मुख्य वजह माना जा रहा है। उनके साथ ही करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह परिहार, शिवसेना अध्यक्ष हरीकपुर सिंह, शिवप्रताप सिंह कन्नौजिया, क्षत्रिय प्रदेश अध्यक्ष आनंद वल्लभ सिंह, राणा प्रताप सिंह, श्रीनिवास सिंह, बिलासपुर से आशीष सिंह और प्रफुल सिंह सहित कई प्रमुख सामाजिक नेताओं ने इस मांग को लेकर जमीनी स्तर पर मोर्चा खोल रखा था।
नेताओं द्वारा लगातार उठाई जा रही न्याय की मांग और आंदोलनों के व्यापक प्रभाव के चलते ही शासन को यह संवेदनशील निर्णय लेना पड़ा है।
दोषियों को कठोरतम दंड देने की मांग
शासन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए राजपूत क्षत्रिय समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने कहा कि यह फैसला समाज की अटूट एकजुटता, निरंतर संघर्ष और न्याय के प्रति उनके अडिग संकल्प की ऐतिहासिक जीत है।
”न्याय के लिए उठी आवाज़ कभी व्यर्थ नहीं जाती। एकता, संघर्ष और संकल्प की आज जीत हुई है।”
अब समाज की एकमात्र और स्पष्ट मांग है कि देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी इस मामले में बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के पूरी तरह निष्पक्ष जांच करे। समाज ने मांग की है कि इस अमानवीय घटना के पीछे छिपे असली दोषियों को बेनकाब कर उन्हें कठोर से कठोर कानूनी दंड दिलाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
जय राजपूताना। जय क्षत्रिय समाज।

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