पावन धरा मुंगेली में केसरवानी परिवार द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण श्री गिरी बापू जी का 811 बी कथा का 5 वा दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहें है

मुंगेली – पावन धरा मुंगेली में केसरवानी परिवार द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण श्री गिरी बापू जी का 811 बी कथा का 5 वा दिवस में गिरी बापू जी ने लिंग प्रगत्य की कथा सुनाएं जिसमें आकाश के स्वरूप हम शिव को पूछते हैं और पीठ के रूप में जगदंबा जी को पूजते हैं, सबसे पहले शिवजी को ब्रह्मा और विष्णु जी ने पूजा है और वह भी कैसे तो निर्मल भाव से और ऐसे करने से जन्म की सारी दुख नष्ट हो जाती है विश्व में पहली पूजा निराकार शिव की गई| 
मुख्य यजमान एवं आयोजक मिथिलेश केशरवानी, दीनानाथ केशरवानी, आनंद केशरवानी, नवीन केशरवानी नें जानकारी देते हुए बताया की 11 जून तक चलने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहें है गिरि बापू ने कहा यदि मनुष्य को प्रकृति रीढ़ से मुक्त होना है तो प्रातः काल शिव को याद करें और जीवन में संध्या को मंगल करना है तो शिव को याद करें शिव को याद करने से शांति मिलती है बाबूजी ने कहा कोई भी मनुष्य किसी भी समय शिव को याद कर सकते हैं पूजा कर सकते हैं महादेव के जीवन में कोई भेद नहीं है महादेव की दुनिया में सदा निरंतर रहती है शिव जी अपने अपने भक्त का 24 घंटे इंतजार करते रहते हैं की भक्त आए और मैं उनका कल्याण करूं और शिव जागृति देव है और और निरंतर वह जागते रहते हैं इसलिए उसे जागेश्वर कहा गया है वक्त और सोता के बीच की दूरियों की बात कही और श्रोताओं को कहा की श्रोताओं को अत्यधिक लालची नहीं होना चाहिए रामचरितमानस की एक दोहा के माध्यम से बताया कि कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जो जस कर ही सो तस फल चखा, कलयुग में जो जैसा करता है उसे वैसा कर्म का फल मिलता है यह निश्चित है कोई किसी को दुख और किसी को सुख नहीं दे सकता और आगे बताया इस संसार का मूल शिव है मूल को पकड़ो सभी देवताओं की पूजा हो जाएगी और आगे कहा शिव ज्ञान का केंद्र है शिवाला यंत्र है और कहां जिस पुराने महादेव की महिमा नहीं वह पुराण नहीं जिस शास्त्र में शिव जी का महिमा नहीं वह शास्त्र नहीं वास्तविक में महादेव की ज्योतिर्लिंग एक करोड़ है पर मुख्यतः 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित है यदि किसी मनुष्य को अपने जीवन की अंतिम यात्रा को मंगल करनी है तो सभी तीर्थ की यात्रा करनी चाहिए इस संसार में इस धरती में इतनी शिवलिंग है जिसका आज तक कोई गाना नहीं कर सका और आगे कहा जिस घर पर शिव मंदिर नहीं उसे घर की भोजन नहीं करना चाहिए और इस धरती पर जिसके अंदर शिव भक्ति नहीं उसे अभागा कहा गया अपनी कथा के दौरान चित्रात्मक शैली भावात्मक शैली और आध्यात्मिक श्रद्धा और ज्ञान अनुशासन आत्मक प्रेरणात्मक और मनुष्य को सीख लेने वाली बहुत प्रेरणादाई कथा कही गिरि बापू जी ने आगे बताया शिव की दुनिया में कोई उच्च नहीं कोई छोटा नहीं सब समान है और एक भ्रांतियां और दूर करें की अपवित्र अवस्था में कभी गर्भवती में प्रवेश नहीं करना चाहिए सुंदर सुझा दिया कि गर्भ में जाने से पहले पूरी वस्त्र गिला कर कर ही प्रवेश करें पूरा कथा के दौरान पंडाल शिव में हो गया था मानव कैलाश में महादेव सप्त ऋषियों को कथा सुना रही हो।
गिरी बापू जी की कथा चित्रात्मक, भावनात्मक, अनुशासित और प्रेरणात्मक शैली में समाहित रही, जिससे पंडाल में बैठे श्रोतागण आत्मिक रूप से शिवमय हो उठे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कैलाश में स्वयं महादेव सप्तऋषियों को कथा सुना रहे हों।





