अविभाजित मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण और फिर संसद तक, 40 वर्षों से राजनीति के केंद्र में हैं ‘बृजमोहन’।
रायपुर✍️:
छत्तीसगढ़ की सियासत में जब भी किसी ऐसे नेता का नाम लिया जाता है जो जमीन से जुड़ा हो और चुनाव जीतना जिसकी आदत बन चुकी हो, तो एक ही नाम उभरता है— बृजमोहन अग्रवाल आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके बचपन से लेकर अब तक के उस सफर को, जिसने उन्हें प्रदेश का सबसे कद्दावर नेता बना दिया।

छत्तीसगढ़ में आठ बार विधायक और पांच बार मंत्री रह चुके 65 वर्षीय बृजमोहन अग्रवाल, जिन्होंने 1990 के बाद से कभी भी विधानसभा चुनाव नहीं हारा है, ने जून में अपने राजनीतिक करियर में एक और उपलब्धि जोड़ ली, जब वे पहली बार लोकसभा सांसद बने और अपने प्रतिद्वंद्वी को राज्य में सबसे बड़े अंतर से हराया – 1.05 लाख से अधिक वोटों से।
1. बचपन और शिक्षा: रायपुर की गलियों से शुरुआत
बृजमोहन अग्रवाल का जन्म 1 मई 1959 को रायपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता रामजीलाल अग्रवाल एक समाजसेवी थे, जिनसे उन्हें जनसेवा के संस्कार विरासत में मिले। उनकी शुरुआती शिक्षा रायपुर में ही हुई। बचपन से ही वे मेधावी होने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता के धनी थे।
2. छात्र राजनीति: जब बुलंद की अपनी आवाज
बृजमोहन अग्रवाल के राजनीतिक सफर की नींव 1977 में पड़ी, जब वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए।
- 1980 के दशक में: वे कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष बने और युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाई।
- संघर्ष का दौर: अविभाजित मध्य प्रदेश के समय जब भाजपा एक छोटे संगठन के रूप में थी, तब उन्होंने सड़कों पर उतरकर आंदोलन किए और कई बार जेल भी गए। उनकी निर्भीकता ने उन्हें तत्कालीन दिग्गज नेताओं की नजरों में ला दिया।
3. ‘अजेय’ विधायक: 1990 से शुरू हुआ जीत का सिलसिला
बृजमोहन अग्रवाल ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1990 में जीता। तब वे अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा के सबसे युवा सदस्यों में से एक थे।
- इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1990 से लेकर 2023 तक, उन्होंने लगातार 8 बार विधानसभा चुनाव जीता।
- रायपुर दक्षिण (पहले रायपुर शहर) उनकी ऐसी अभेद्य किला बन गया, जिसे कोई भी लहर हिला नहीं सकी।
4. कुशल प्रशासक: मंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ को संवारा
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद, डॉ. रमन सिंह की सरकार में उन्होंने महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
- पर्यटन और संस्कृति: उन्होंने राजिम कुंभ (पुन्नी मेला) को भव्य स्वरूप दिया और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाई।
- कृषि और शिक्षा: मंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों के हित में और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए कई बड़े फैसले लिए।
5. दिल्ली का सफर: लोकसभा में ऐतिहासिक कदम
साल 2024 उनके करियर का एक नया मोड़ साबित हुआ। पार्टी के निर्देश पर उन्होंने रायपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और 5.75 लाख से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। यह जीत इस बात का प्रमाण थी कि रायपुर की जनता उन्हें केवल एक विधायक नहीं, बल्कि अपना सबसे भरोसेमंद अभिभावक मानती है।
एक जननेता की सादगी
इतने ऊंचे पदों पर रहने के बाद भी बृजमोहन अग्रवाल की सबसे बड़ी खासियत उनका ‘मिलनसार स्वभाव’ है। रायपुर के मौदहापारा स्थित उनके निवास पर आज भी आम जनता बिना किसी अपॉइंटमेंट के मिल सकती है। सुख हो या दुख, वे अपने क्षेत्र के हर परिवार के साथ खड़े नजर आते हैं।
“राजनीति मेरे लिए पेशा नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है।” – इसी मंत्र के साथ बृजमोहन अग्रवाल आज भी सक्रिय हैं और छत्तीसगढ़ की उन्नति के लिए समर्पित हैं।
बृजमोहन अग्रवाल जी के बारे में कुछ रोचक तथ्य:
- रिकॉर्ड जीत: छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा बार विधायक बनने का रिकॉर्ड।
- युवा आइकन: आज भी युवाओं के बीच ‘भैया’ के रूप में बेहद लोकप्रिय।
- संकटमोचक: भाजपा के लिए छत्तीसगढ़ में किसी भी राजनीतिक संकट के समय वे मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाते हैं।

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