जबलपुर। प्रकृति जब अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान बेबस हो जाता है, लेकिन एक माँ की ममता उस मौत के तांडव के सामने भी अडिग खड़ी रहती है। बरगी डैम में हुए दर्दनाक नाव हादसे के 15 घंटे बाद जब रेस्क्यू टीम ने पानी से माँ और बच्चे के शव को निकाला, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और कलेजा मुंह को आ गया।
अंतिम सांस तक ढाल बनी रही माँ
सामने आई हृदयविदारक तस्वीर में देखा जा सकता है कि मौत के उस खौफनाक मंजर में भी माँ ने अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से चिपकाए रखा। पानी की लहरों और मौत के साए के बीच भी माँ की बाहें बच्चे के लिए सुरक्षा कवच बनी रहीं। 15 घंटे तक पानी के भीतर रहने के बाद भी माँ की पकड़ ढीली नहीं पड़ी, जो यह साबित करता है कि एक माँ के लिए उसका बच्चा उसकी जान से भी बढ़कर है।
ममता का अमर बलिदान
यह केवल एक दुर्घटना की खबर नहीं है, बल्कि उस निस्वार्थ प्रेम की दास्तान है जिसे ईश्वर का सबसे पवित्र रूप माना जाता है। हादसे के वक्त जब चारों ओर चीख-पुकार मची होगी, तब उस माँ ने खुद को बचाने के बजाय अपने लाल को महफूज रखने की कोशिश की होगी। आज भले ही दोनों हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन यह तस्वीर समाज को यह अहसास करा गई कि माँ की ममता का कोई विकल्प नहीं और उसकी शक्ति असीम है।
सोशल मीडिया पर उमड़ा जनसैलाब
इस तस्वीर के वायरल होने के बाद हर कोई इस बहादुर माँ को नमन कर रहा है। लोग इसे “ममता का जीवंत प्रमाण” और “त्याग की पराकाष्ठा” बता रहे हैं। बरगी के पानी ने भले ही दो जिंदगियां छीन ली हों, लेकिन वह माँ के उस अटूट संकल्प को नहीं डुबा सका, जो उसने अपने बच्चे को जन्म देते समय उसे हर संकट से बचाने के लिए लिया था।
“माँ केवल एक नाम नहीं, वह एक अहसास है जो मृत्यु के बाद भी अपने बच्चे को अकेला नहीं छोड़ती।”
इस महान और त्यागमयी माँ के चरणों में हमारा कोटि-कोटि नमन।

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